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राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला में हिन्दी पखवाड़ा
प्रेस रिलीज
Tuesday, October 02 | 02:50 PM
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राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला में (एनसीएल) आयोजित हिन्दी पखवाड़ा समारोह में मार्गदर्शन करते हुए डॉ. महेंद्र पवार. इस समय मंचपर स्वाती चढ्ढा, अश्वनीकुमार नांगिया, डॉ. गोखले और पूजा कुलकर्णी

पुना : राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला  में (एनसीएल) १४ से २७ सितंबर के दौरान हिन्दी पखवाड़ा समारोह आयोजित किया गया । इस पखवाड़े के अंतर्गत राजभाषा हिन्दीके प्रयोग को बढ़ावा देने की दृष्टि से विभिन्न प्रतियोगिताएं, हिंदीसंबंधी गतिविधियों का आयो‍जन किया गया, जिनमें स्टाफ एवं शोध छात्रों ने बड़ी संख्या में उत्साहपूर्वक प्रतिभाग लिया। 

 27 सितंबर को ‘एनसीएल आलोक’ पत्रिका का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय जल और विद्युत अनुंसधान केंद्र ,खड़कवासला के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महेंद्र पवार तथा अध्यक्ष के रूप में प्रो. अश्विनी कुमार नांगिया (निदेशक) , हिन्दी् पखवाड़ा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. एस.पी.गोखले (प्रधान वैज्ञानिक), प्रशासन अधिकारी पूजा कुलकर्णी तथा हिन्दी अधिकारी डॉ. स्वाति चढ्ढा उपस्थित थे। 

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. महेंद्र पवार ने अपने संबोधन में कहा, ‘हिन्दी हमारे देश की केवल संपर्क भाषा नहीं बल्कि जन भाषा है। इसके बावजूद भी हम सभी भारतीयों को इस भाषा के प्रचार-प्रसार में अपना योगदान देने की आवश्यकता है; ताकि शिक्षा, रोजगार और प्रशासन के क्षेत्र में इस भाषा को अच्छी तरह से लागू किया जा सकें।’ 

उन्होंने एनसीएलद्वारा राजभाषा पत्रिका एनसीएल आलोक के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा, ‘विभिन्नभ प्रकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी लेखों को जन मानस की सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, इससे निश्चय ही हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार होगा एवं विज्ञान के क्षेत्र में भी इस भाषा का उपयोग बढ़ेगा।’

 डॉ. एस. पी. गोखलेने हिन्दी पखवाड़े के दौरान आयोजित कार्यक्रमों की जानकारी दी। 

कार्यक्रम के अध्यतक्ष तथा निदेशक प्रो. अश्विनी कुमार नांगियाने अपने संबोधन में कहा, ‘हिन्दी हमारे राष्ट्र  की भाषा है, हमारे देश की पहचान है। हमारे एनसीएल में हिन्दी भाषा का प्रशासन तथा अन्य सभी क्षेत्रों में संतोषजनक प्रयोग हो रहा है। हिन्दी पत्रिका का प्रकाशन, वेबसाईट का द्विभाषीकरण तथा हिन्दी माध्यम से संगोष्ठियों का आयोजन हमारी हिन्दी भाषा के प्रति निष्ठा का प्रमाण है।’ उन्होंने उपस्थित स्टाफ सदस्योंसे अपील की कि, ‘सभी वैज्ञानिक/अधिकारी/कर्मचारी अधिक से अधिक राजभाषा हिन्दी में कार्य करें।' 

तत्पश्चात विभिन्नि प्रतियोगिताओं के विजेताओं तथा सरकारी कामकाज में राजभाषा हिन्दी का उल्लेकखनीय प्रयोग करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों को अध्यक्ष एवं मुख्य अतिथि के द्वारा पुरस्कृत किया गया । साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं में आंतरिक निर्णायक की भूमिका निभानेवाले पदाधिकारियों को भी स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
 
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M K PAWAR About 18 Days ago
Nice reporting.
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